दृक गणित एवं सूर्य सिद्धांत पंचांग

20 Feb 2027 दैनिक वैदिक पंचांग

नई दिल्ली के लिए सूर्य-चंद्रमा की सटीक खगोलीय स्थिति, पंचांग के पांच दिव्य अंग (तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण) और श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त।

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भाषा (Language):
✦ पूर्णिमा व्रत ✦

पूर्णिमा व्रत व सत्यनारायण कथा

पवित्र नदी स्नान, दीपदान, दान-पुण्य एवं श्री सत्यनारायण भगवान की कथा।

शनिवार, 20 फ़रवरी 2027

विक्रम संवत् 2084
शुभ मुहूर्त सूची
तिथि
शुक्ल पक्ष पूर्णिमा
शुक्ल पक्ष
नक्षत्र
मघा
नक्षत्र मंडल
योग
अतिगण्ड
सूर्य-चंद्र संरेखण
करण
बव
तिथि अर्ध भाग
वार (दिन)
शनिवार
स्वामी: शनि देव

सूर्य एवं चंद्र खगोलीय समय

नई दिल्ली
सूर्योदय
06:54 AM
सूर्यास्त
06:15 PM
चन्द्रोदय
05:42 PM
चन्द्रास्त
06:20 AM
सूर्य राशि: कुंभ
चन्द्र राशि: सिंह

शुभ एवं अशुभ काल

सटीक गणना
सर्वश्रेष्ठ शुभ काल अभिजीत मुहूर्त:
12:10 PM – 12:58 PM
अशुभ काल (त्याज्य) राहु काल:
09:44 AM – 11:09 AM
ब्रह्म मुहूर्त: 05:18 AM – 06:06 AM
यमगण्ड काल: 02:00 PM – 03:25 PM
गुलिक काल: 06:54 AM – 08:19 AM
शुभ होरा: Guru (08:54 AM – 09:54 AM), Shukra (01:54 PM – 02:54 PM)
✦ शुभ समय एवं मुहूर्त अंतराल ✦

दैनिक चौघड़िया मुहूर्त

चौघड़िया एक प्राचीन वैदिक समय प्रणाली है जो दिन और रात को आठ शुभ (अमृत, शुभ, लाभ, चर) और अशुभ (रोग, काल, उद्वेग) मुहूर्तों में विभाजित करती है।

मुहूर्त प्रकार वैदिक प्रकृति समय अवधि शुभ कार्य एवं उपाय
काल
कष्टप्रद (काल)
06:54 AM – 08:19 AM
शनि का समय; शुभ कार्य वर्जित, केवल ध्यान व साधना हेतु उपयुक्त।
शुभ
अति शुभ
08:19 AM – 09:44 AM
धार्मिक अनुष्ठान, विद्यारंभ, यात्रा, यज्ञ-हवन एवं नए निवेश हेतु उत्तम।
रोग
अशुभ (रोग)
09:44 AM – 11:09 AM
महत्वपूर्ण अनुबंध, शल्य चिकित्सा, ऋण लेन-देन व नए काम से बचें।
उद्वेग
अशुभ (उद्वेग)
11:09 AM – 12:34 PM
वित्तीय जोखिम, सट्टा, वाद-विवाद एवं संपत्ति सौदों से परहेज करें।
चर
सामान्य (चर)
12:35 PM – 02:00 PM
यात्रा, वाहन क्रय, गतिमान कार्य एवं नए स्थान प्रस्थान हेतु अनुकूल।
लाभ
लाभप्रद
02:00 PM – 03:25 PM
व्यापार, नई दुकान या प्रतिष्ठान का उद्घाटन, अनुबंध एवं आर्थिक कार्य।
अमृत
सर्वोत्तम
03:25 PM – 04:50 PM
सभी मांगलिक कार्य, विवाह, साक्षात्कार, पदभार ग्रहण एवं औषधि सेवन हेतु सर्वश्रेष्ठ।
काल
कष्टप्रद (काल)
04:50 PM – 06:15 PM
शनि का समय; शुभ कार्य वर्जित, केवल ध्यान व साधना हेतु उपयुक्त।